मेरी ताकत

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कर ले ऐ-दुनिया तू चाहें सितम जितना

ना मैं बिखरा था, ना बिखरूँगा !

जो होजाऊं मैं धूमिल अंधकार के बादलों में

हर बार सितारे की भाति मैं चमकूँगा !

 

आजमाले मेरे इरादे की ताकत को तू

हर बार इरादों में लेके नई आग मै निकलूंगा !

बिछादे चाहें राह में रोड़े जितने तू

क़दमों को अब ना मैं पीछे हटाऊँगा !

 

ना समझना लाचार मुझे तू

साथ मेरे अच्छाई की ताकत है !

क्या करेगा तू चूर-चूर मुझे

तेरे में क्या इतनी हिमाकत है ??

 

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तूफ़ान

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बड़ा जो अपनी मंजिल की ओर
सामने अपने एक तूफ़ान पाया

देख आता मुझे अपनी ओर
मन ही मन वो मुस्कुराया

सोचा उसने कि मुझे हरा देगा
वजूद मेरा वो मिटा देगा

पर मेरे हौसले के आगे वो टिक ना पाया
आत्म-विश्वास को मेरे वो हिला ना पाया

मानके आखिर में हार वो भी रास्ते से हट गया
देखा मैने एकाएक हर मुसीबत का बादल छट गया

इसी हौसले ने मुझे मेरी मंजिल की ओर बढ़ाया
कर सकता है तू हर मुश्किल का सामना,
उसी ने मुझे ये बतलाया

जिंदगी का सफर

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खोया है कुछ तो कुछ पाया भी है
जिंदगी के सफर ने बहुत कुछ सिखाया भी है

गिरा हूँ अगर तो खुद उठके कदम बढ़ाया भी है
सुख हो या गम दोनों को ही गले लगाया भी है

छूटे कुछ नाते तो कुछ ने साथ निभाया भी है
हुए कुछ पराये तो कुछ ने अपनाया भी है

कुछ सपने बांकी है अभी तो कुछ से खुद को मिलवाया भी है
छलके हैं कभी आंसू गम के तो कभी खुशियों ने महकाया भी है

फक्र से है सीखा सर उठाना तो गलतियों पे सर झुकाया भी है
कुछ का बना मैं सहारा तो कुछ ने सहारा दिलाया भी है

कुछ ने तोड़ा हौसला तो कुछ ने हौसला बंधाया भी है
कभी ये दिल रहा शांत तो कभी इसने गीत गुन-गुनाया भी है

खोया है कुछ तो कुछ पाया भी है
जिंदगी के सफर ने बहुत कुछ सिखाया भी है

HAPPY LABOR DAY

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Genius begins great works; Labor alone finishes them.      – Joseph Joubert

भूल जाऊँ उन्हें मै कैसे जिनके होने से है आज ये देश विक्सित
इन्हीं की बनाई सैकड़ों स्मारकें दुनियाभर में आज हैं चर्चित

धूप हो या बारिश, ना रोक सकी कोई इनके कदम
सामना करने कठिनाईओं का रहते तैयार ये हरदम

बिना शिकायत करते मेहनत रूखी -सूखी खाके
कितनी पीड़ा सहते लेकिन दुनिया को नहीं जताते

नींव हैं ये देश की ,जिसपे देश हमारा है खड़ा
देश के तरक्की पाने में हाथ इनका भी है बड़ा

झुका ना इनका हौंसला, कितने ही पड़े हाथ-पाँव में छालें
कैसे भूलूँ परिश्रम मैं इनका जिन्होंने तूफ़ान में भी हाथ ना डाले

कितना अच्छा होता

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कितना अच्छा होता जो कोई धर्म ही ना होता
हर कोई अपने दिल में बस इंसानियत का बीज ही बोता

कितना अच्छा होता जो संसार में भेदभाव ना होता
फिर रोज- रोज के दंगो से इंसान कभी ना रोता

कितना अच्छा होता जो ये संसार ना बटा होता
एक-दूसरे को दबाने की जगाह एक-दूसरे के सहयोग को दौड़ता

कितना अच्छा होता जो ये पैसा ही ना होता
जिसके लालच में आकर इंसान अपनों को ना खोता

कितना अच्छा होता जो ना कोई मंदिर ना मस्जिद होता
पाता उसे तू खुद में ही, एक बार जो सच्चे दिल से खोजता

कितना अच्छा होता जो चारों ओर बस प्रेम ही प्रेम होता
ना नफरत का जन्म होता ना कोई किसी को कोस्ता

वाह रे पैसा

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There is a sufficiency in the world for man’s need but not for man’s “GREED” !!   –  Mahatma Gandhi

वाह रे पैसा !! कैसा मोह जाल तूने ये फैलाया
होके तेरे वश में लोगों ने अपनों को ही है ठुकराया

तेरे लिए ही आज भाई ने भाई से मुंह है मोड़ा
ओ रे पैसा!! बता तू ही तूने कितनों का घर है तोड़ा ??

चंद कागज़ के टुकड़ों ने ये कैसी आग लगाई
ना जाने कितने ही रिश्तों की तूने बुनियाद है हिलाई

इंसान के बनाए पैसों ने आज इंसान को ही क्या बना दिया
लालच में आके इसके भाई ने भाई का ही खून बहा दिया

इसके आगे पड़ा फीका माँ की ममता, पिता का दुलार
जिसे देखो वो हुआ है इसके लोभ का आज शिकार

असली होली

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गुलाल का रंग तो उतर जाएगा
पर क्या द्वेष और नफरत का रंग उतर पाएगा

रंगो से सने कपड़े तो फिक जाएगें
पर क्या लोग झूठ-फ़रेब  का नकाब फेक पाएगें

मीठे पकवान तो ख़त्म हो जाएंगे
पर क्या लोगों के कड़वे बोल ख़त्म हो पाएगें

भांग का नशा तो दूर हो जाएगा
पर क्या छल-कपट का नशा दूर हो पाएगा

त्यौहार तो हर बार कि तरह फिर आएगा
पर क्या इंसान अच्छाई पे कायम रह पाएगा

असल में तो होली का पर्व तब आएगा
जिस दिन इंसान अपने अंदर छिपी बुराई को जला पाएगा

मुखौटा

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अच्छाई का मुखौटा यहाँ कितनों ने है पहना
देखके अच्छाई उनकी लगे जैसे अच्छाई ही है उनका गहना

पर गुजरते वक़्त के साथ वो मुखौटा गिर जाता
जो असलियत को उनकी उजागर कर जाता

ना जाने क्यों ये दिल समझ बैठा दुनिया की झूठी बातें सही
आया सामने एक कटु सत्य की जो दिखे वो वैसा नहीं

हूँ नासमझ मै कितना जो उनकी असलियत ना जाना
समझ बैठा उन्हें अपना जो अभी तक है अनजाना

देखके ऐसी दुनिया को पहुँचती दिल को गहरी ठेस
जहाँ लोगों ने धारण कर रखा छल -कपट का भेस

मुस्कुराहट

12813956_1029875283738738_1155213662872531074_n.jpgदेखके दो पल तुझे सारी थकान मेरी मिट जाए

देखके मुस्कुराहट तेरी चेहरा मेरा खिल जाए

चेहरे की मासूमियत ने तेरी मन ऐसा ये मोह लिया

की भूल के अपने दर्द सारे ये दिल ख़ुशी से झूम लिया

चंचल भरी अदाएं तेरी मुझको ऐसे भा गईं

नटखट सी छवि ये तेरी मुझपे नशे की भाति छा गई

है कितना मासूम रे तू ,ना छल कपट का तुझ पे कोई परदा

यही तो वो गुण हैं तुझमे जो दुनिया की भीड़ से अलग तुझे करता